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الإسلام العربی
دعوة إلی الحقیقة
 
1390/01/17 :: 12:26 ب.ظ :: نویسنده : .

نظرة المجتمع الجاهلی إلى الأحداث

 

  

یمیل الناس بصفة عامة إلى تقسیم  الأحداث على أنها  جیدة و سیئة. هذا التقسیم غالبا ما یعتمد على عاداتهم أو میولهم. کما أن ردود أفعالهم على تلک الأحداث تتبدل حسب خطورة و هیئة ذلک الحدث؛ ومع ذلک, فما  یشعرون به و ما یواجهونه فی النهایة, یکون محکوما بتقالیدهم الاجتماعیة.

کل واحد منا فی الغالب لدیه بقایا من أحلام الطفولة, حتى فی حیاته المتقدمة, مع أن هذه الخطط   قد لا تتحقق دوما کما توقعها أو خطط لها الواحد منا. فنحن دائما عرضة لأحداث غیر متوقعة فی حیاتنا, وحدث کهذا غیر متوقع, فی لحظة, یمکن أن یلقی بحیاتنا فی فوضى تامة. وبینما یکون الواحد  منا منکبا على سیر حیاته المعتادة, قد یواجه بسلسة تغییرات, قد تظهر للوهلة الأولى على أنها سلبیة. فمثلا, یمکن لإنسان معافى أن یستسلم لمرض ممیت, أو یفقد قدرته على الحرکة فی أحد الحوادث. أیضا, فقد یفقد رجل ثریّ کل ثروته فجأة.

إنّ ردود فعل الناس على هذا التغیر فی دولاب الأحداث یختلف اختلافا کبیرا. فردة فعلهم تکون جیدة طالما أن هذا الحدث مرغوبٌ فیه. بینما عندما یواجهون بما هو غیر متوقع یمیلون للشعور بخیبة الأمل, أو حتى الغضب. و حسب أهمیة تعلقهم بتلک الأحداث, ومحصلتها النهائیة, فانّ غضبهم قد یصبح شدیدا جدا. إنّ هذا الاتّجاه کثیرا ما یشیع فی المجتمعات التی ینتشر فیها الجهل.

وهناک البعض من هؤلاء یقولون عند حدوث ما یخیّب أملهم " لا بدّ وأن  یکون هناک خیر فی هذا". ولکنها مجرّد کلمات یتفوهون بها دون أدنى فهم لمعناها الحقیقی, إنما فقط لاتباعهم عرفا اجتماعیا.

وهناک مجموعة أخرى من الناس الذین هم على استعداد لینظروا فی حقیقة الهدف الإلهی وراء أحداث بسیطة. ولکن عندما یُواجهون بأحداث جسیمة قد تعود علیهم بالضرر، فإنهم ینسون مثل هذا العزم أو النیة. فمثلا، من الممکن لشخص ما أن لا ینزعج لتعطل محرک سیارته وهو فی طریقه إلى العمل, ویبدی استعداده لتفهم الخیر الممکن فی ذلک. ولکن, إذا ما کان تأخره عن العمل یثیر غضب مدیره ویعرضه للفصل من عمله, عنذئذ یکون ذلک سببا کافیا للاحتجاج. وقد یتصرف بأسلوب شبیه بهذا فیما لو فقد قطعة ثمینة من المجوهرات بدلا من ساعة ید زهیدة الثمن. وکما تشیر هذه الأمثلة, فهناک أحداث ثانویة معینة, یتفاعل معها الناس بعقلانیة, أو یولون استعدادهم لفهم الخیر منها؛ بینما الأحداث الأکثر إیلاما تسوقهم لیثبتوا تهورهم وغضبهم.

وبعض الناس یطلقون هذه العبارات بهدف البحث عن المواساة, دون أن یدرکوا حقا المدلول الصحیح لـ "توسّم الخیر فی کل شیء". وبهذا النمط, فهم یؤمنون بکونه طریقة  لمد ید العون للمهمومین, لفرد من العائلة خسر مشروعا تجاریا مثلا, أو لصدیق رسب فی امتحان. ولکن,عندما  تکون مصالحهم فی دائرة الخطر, عندها لا یبدون أدنى داع لرؤیة "الخیر" فیه, کاشفین بذلک الستار عن قمة جهلهم.

إنّ القصور فی رؤیة الخیر فیما یمر على الفرد من أحداث, ینبع من القصور فی إیمانه. فقصوره   فی إدراک أن الله تعالى هو الذی سبق وقدر کل حدث فی حیاة کلّ منا, وأن کل شیء إنّما یحدث وفقا لقدر معین قد سبق إعداده, وأنّ هذه الحیاة الدنیا لیست سوى امتحان, هو الذی یحجب العین عن رؤیة الخیر وإدراکه فی ما یحدث لنا.

فی الجزء التالی, سوف نستطلع هذا المعنى. وهو, أن نؤمن بأنّ هناک خیرا فی کل ما یحدث لنا, ونستطلع الحقائق المتعلقة بهذا الأمر.

       



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